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कौन-कौन से मामले गैर-जमानती होते हैं? जानिए Non-Bailable Offences

जानिए भारत में कौन-कौन से अपराध गैर-जमानती होते हैं और ऐसे मामलों में जमानत की प्रक्रिया क्या है।

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Published 16 September 2026

भारत में किसी आपराधिक मामले में जमानत मिलेगी या नहीं, यह मुख्य रूप से संबंधित अपराध की कानूनी classification और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के तहत किसी अपराध को bailable या non-bailable बताया जा सकता है। BNSS 1 जुलाई 2024 से लागू है और इसकी First Schedule में विभिन्न अपराधों की classification दी गई है।

गैर-जमानती अपराध क्या होता है?

गैर-जमानती अपराध यानी Non-Bailable Offence वह अपराध है जिसमें आरोपी को जमानत मिलना स्वतः उसका कानूनी अधिकार नहीं होता। ऐसे मामले में जमानत देने का निर्णय सामान्यतः संबंधित अदालत द्वारा मामले के तथ्यों, अपराध की गंभीरता, उपलब्ध सामग्री और अन्य कानूनी परिस्थितियों को देखते हुए किया जाता है।

इसका यह अर्थ नहीं है कि गैर-जमानती मामले में आरोपी को जमानत नहीं मिल सकती। उचित परिस्थितियों में अदालत जमानत दे सकती है। इसलिए “non-bailable” को “bail बिल्कुल नहीं मिलेगी” समझना सही नहीं है।

कौन-कौन से मामले गैर-जमानती होते हैं?

गैर-जमानती अपराधों की कोई एक छोटी सूची नहीं है। अपराध की संबंधित धारा और उसके उप-प्रावधान को देखकर classification तय की जाती है। BNSS की First Schedule में अपराध के साथ यह भी बताया गया है कि वह cognizable या non-cognizable तथा bailable या non-bailable है।

गंभीर प्रकृति के कई अपराध non-bailable होते हैं। उदाहरण के तौर पर:

1. हत्या से संबंधित अपराध

हत्या जैसे गंभीर अपराधों में कठोर दंड का प्रावधान है और संबंधित classification non-bailable हो सकती है। ऐसे मामलों में जमानत का निर्णय अदालत द्वारा मामले की परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है।

2. डकैती और कुछ robbery offences

BNSS First Schedule के अनुसार robbery तथा dacoity से संबंधित कई अपराध non-bailable हैं। उदाहरण के लिए BNS Section 309(4) के तहत robbery और Section 310 के तहत dacoity से संबंधित प्रावधानों को non-bailable classification दी गई है।

3. संगठित अपराध

BNS Section 111 के अंतर्गत organised crime से संबंधित गंभीर अपराधों को भी non-bailable classification दी गई है। अपराध की प्रकृति के अनुसार इसमें बहुत कठोर सजा का प्रावधान हो सकता है।

4. राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े कुछ गंभीर अपराध

BNS में भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता तथा युद्ध से संबंधित कुछ गंभीर अपराधों को भी non-bailable बनाया गया है। उदाहरण के लिए First Schedule में Section 152 और कुछ संबंधित प्रावधानों के लिए non-bailable classification दी गई है।

5. गंभीर house-trespass और house-breaking के कुछ मामले

सभी property-related offences एक समान नहीं होते। लेकिन BNS Section 331 के तहत lurking house-trespass और house-breaking के विभिन्न रूपों को First Schedule में non-bailable classification दी गई है। उप-धारा और परिस्थितियों के अनुसार सजा और अन्य classification अलग हो सकती है।

Non-Bailable और Cognizable में क्या अंतर है?

इन दोनों शब्दों को अक्सर एक ही समझ लिया जाता है, जबकि इनका अर्थ अलग है।

Cognizable offence में कानून के अनुसार पुलिस बिना warrant गिरफ्तारी कर सकती है।

Non-bailable offence में आरोपी को bail स्वतः अधिकार के रूप में नहीं मिलती और bail के लिए संबंधित कानूनी प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है।

इसलिए कोई अपराध एक साथ cognizable और non-bailable हो सकता है। BNSS की First Schedule में दोनों classifications अलग-अलग columns में दी जाती हैं।

Non-Bailable Case में Bail कैसे मिलती है?

यदि किसी व्यक्ति पर non-bailable offence का आरोप है, तो bail के लिए अदालत के सामने उचित application प्रस्तुत की जा सकती है। अदालत मामले की प्रकृति और उपलब्ध रिकॉर्ड को देखकर निर्णय करती है।

जमानत पर विचार करते समय मामले की परिस्थितियां, आरोपी की भूमिका, उपलब्ध evidence, आरोप की गंभीरता और कानून में लागू अन्य factors महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

इसलिए केवल यह देखकर कि कोई offence non-bailable है, यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आरोपी को हर परिस्थिति में जेल में ही रहना होगा।

क्या Non-Bailable Case में Police सीधे Bail दे सकती है?

Non-bailable offence में bail का कानूनी framework bailable offence से अलग होता है। कुछ परिस्थितियों में पुलिस अधिकारी के पास भी कानून के तहत bail से संबंधित powers हो सकती हैं, जबकि कई मामलों में अदालत से bail लेना आवश्यक होता है।

इसलिए किसी specific case में यह देखना जरूरी है कि FIR में कौन-सी धारा लगाई गई है, उसका exact classification क्या है और मामला किस procedural stage पर है।

जमानत के लिए किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?

Non-bailable case में bail application तैयार करते समय सामान्यतः निम्न बातों को समझना महत्वपूर्ण होता है:

FIR में लगाई गई exact sections की जांच करें।

देखें कि प्रत्येक section bailable है या non-bailable।

आरोपी की alleged role और उपलब्ध evidence को समझें।

गिरफ्तारी हो चुकी है या केवल FIR दर्ज हुई है, यह स्पष्ट करें।

संबंधित अदालत और लागू bail provision की पहचान करें।

किसी भी previous criminal case या relevant court order की जानकारी उपलब्ध रखें।

दस्तावेज और अन्य relevant evidence व्यवस्थित रखें।

क्या हर गंभीर अपराध में Bail असंभव है?

नहीं। “Non-bailable” का अर्थ “no bail” नहीं होता। BNSS में non-bailable offence की अलग classification है, लेकिन उपयुक्त मामलों में bail का निर्णय अदालत कर सकती है। इसलिए किसी व्यक्ति को केवल offence के नाम के आधार पर यह मान लेना नहीं चाहिए कि bail की कोई संभावना नहीं है।

किसी वास्तविक मामले में लागू section की exact wording, आरोप की प्रकृति और case facts देखकर ही उचित कानूनी स्थिति समझी जा सकती है।

निष्कर्ष

भारत में गैर-जमानती अपराधों की classification मुख्य रूप से लागू कानून और BNSS की First Schedule से निर्धारित होती है। हत्या, robbery, dacoity, organised crime तथा कुछ अन्य गंभीर अपराधों के कई प्रावधान non-bailable हैं। हालांकि, non-bailable offence का मतलब यह नहीं है कि bail कभी नहीं मिल सकती।

यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज हुई है या गिरफ्तारी की आशंका है, तो FIR में लगाई गई धाराओं की exact classification और उपलब्ध bail remedies को जल्द समझना महत्वपूर्ण है। किसी specific मामले में कानूनी सलाह लेने से पहले FIR, relevant documents और court records को ध्यान से देखना चाहिए।

कानूनी अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से है और इसे किसी विशेष मामले में कानूनी सलाह नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी मामले में लागू कानून और न्यायिक परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। यह जानकारी advocate-client relationship स्थापित नहीं करती

गैर-जमानती अपराध क्या होता है?
गैर-जमानती अपराध वह अपराध है जिसमें आरोपी को जमानत स्वतः अधिकार के रूप में नहीं मिलती। जमानत का निर्णय लागू कानून और मामले की परिस्थितियों के अनुसार किया जाता है।
क्या गैर-जमानती मामले में जमानत मिल सकती है?
हाँ। गैर-जमानती अपराध का अर्थ यह नहीं है कि जमानत बिल्कुल नहीं मिल सकती। उपयुक्त परिस्थितियों में संबंधित अदालत जमानत दे सकती है।
क्या हत्या का मामला गैर-जमानती होता है?
हत्या से संबंधित गंभीर अपराध non-bailable classification में आते हैं। हालांकि किसी मामले में लागू exact section और परिस्थितियों की जांच करना आवश्यक है।
क्या robbery और dacoity गैर-जमानती अपराध हैं?
BNSS की First Schedule में robbery और dacoity से संबंधित कई अपराधों को non-bailable classification दी गई है। संबंधित उप-धारा की जांच करना आवश्यक है।
Non-bailable और cognizable offence में क्या अंतर है?
Cognizable offence का संबंध पुलिस की warrant के बिना गिरफ्तारी करने की शक्ति से है, जबकि non-bailable का संबंध bail के अधिकार और bail देने की प्रक्रिया से है।
Non-bailable case में bail के लिए क्या करना होता है?
Non-bailable case में लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार bail application संबंधित अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जा सकती है। अदालत मामले के facts और कानून के आधार पर निर्णय करती है।