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अगर पुलिस नहीं सुनती तो कहाँ शिकायत करें? जानिए कानूनी उपाय

अगर पुलिस शिकायत या FIR दर्ज नहीं करती तो SP और Magistrate के पास शिकायत करने की प्रक्रिया जानें।

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Published 16 September 2026

जब किसी व्यक्ति के साथ अपराध होता है और पुलिस उसकी शिकायत या FIR दर्ज करने में उचित कार्रवाई नहीं करती, तो कानून में आगे शिकायत करने के रास्ते उपलब्ध हैं। ऐसे मामलों में यह समझना जरूरी है कि alleged offence cognizable है या non-cognizable और पुलिस ने किस स्तर पर कार्रवाई करने से इनकार किया है।

वर्तमान में criminal procedure मुख्य रूप से Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (BNSS) के तहत संचालित होती है। BNSS की Section 173 cognizable offences की information से संबंधित है।

अगर पुलिस शिकायत नहीं सुनती तो सबसे पहले क्या करें?

यदि किसी व्यक्ति ने किसी cognizable offence की information पुलिस को दी है लेकिन officer in charge उसे record नहीं कर रहा, तो केवल मौखिक रूप से बार-बार शिकायत करने के बजाय उपलब्ध legal procedure को follow करना महत्वपूर्ण है।

सबसे पहले complaint की एक लिखित copy तैयार रखें और उसमें घटना की तारीख, समय, स्थान, आरोपी की जानकारी, घटना का विवरण और उपलब्ध evidence का उल्लेख करें।

यदि police station में complaint दी गई है, तो उसकी receiving, diary number या अन्य acknowledgement उपलब्ध हो तो उसे सुरक्षित रखें।

BNSS Section 173 क्या कहती है?

BNSS Section 173 के अनुसार cognizable offence से संबंधित information, offence जिस area में हुआ उसकी परवाह किए बिना, police station के officer in charge को दी जा सकती है। Information oral या electronic communication के माध्यम से भी दी जा सकती है। Electronic communication से दी गई information को record पर लेने के लिए संबंधित व्यक्ति को तीन दिनों के भीतर sign करना होता है।

इसका मतलब यह है कि cognizable offence की information देने के लिए केवल घटना के exact local jurisdiction को लेकर शिकायतकर्ता को रोकना सामान्य नियम नहीं है।

अगर Police FIR दर्ज नहीं करती तो SP को शिकायत करें

यदि officer in charge cognizable offence की information record करने से मना करता है, तो BNSS Section 173(4) महत्वपूर्ण हो जाती है।

इस provision के अनुसार aggrieved person information का substance लिखित रूप में और post द्वारा Superintendent of Police (SP) को भेज सकता है।

यदि SP को information से cognizable offence का commission दिखाई देता है, तो वह स्वयं investigation कर सकते हैं या किसी subordinate police officer को investigation करने का निर्देश दे सकते हैं।

इसलिए police station पर शिकायत दर्ज न होने की स्थिति में SP को written complaint भेजना एक महत्वपूर्ण statutory remedy है।

SP को Complaint में क्या लिखें?

SP को भेजी जाने वाली complaint में facts को स्पष्ट और chronological तरीके से लिखना चाहिए।

इसमें सामान्यतः शामिल किया जा सकता है:

शिकायतकर्ता का नाम और contact details;

घटना की तारीख और समय;

घटना का स्थान;

आरोपी की जानकारी, यदि उपलब्ध हो;

घटना का पूरा विवरण;

संबंधित police station का नाम;

police station में कब और कैसे complaint दी गई;

police ने क्या कार्रवाई की या क्यों complaint record नहीं की;

उपलब्ध CCTV, photographs, videos या documents;

witnesses की जानकारी;

police से requested action।

Complaint में केवल verified facts लिखना बेहतर होता है।

SP को Complaint कैसे भेजें?

BNSS Section 173(4) में information को लिखित रूप में और post द्वारा SP को भेजने का विशेष उल्लेख है। इसलिए complaint की copy और भेजने का proof सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है।

व्यक्ति अपने राज्य की police द्वारा उपलब्ध अन्य official complaint mechanisms का भी उपयोग कर सकता है, यदि वे उपलब्ध हों।

Complaint भेजने के बाद acknowledgement, postal receipt और submitted documents की copies संभालकर रखना चाहिए।

अगर SP भी कार्रवाई नहीं करता तो क्या करें?

यदि statutory procedure के अनुसार SP को complaint देने के बाद भी उचित कार्रवाई नहीं होती, तो परिस्थितियों के अनुसार Magistrate के समक्ष application का विकल्प उपलब्ध हो सकता है।

BNSS Section 175(3) के अनुसार empowered Magistrate, Section 173(4) के तहत supported application पर विचार करने के बाद, आवश्यक inquiry और police officer की submission पर investigation का order कर सकता है।

इसलिए police station और SP के स्तर पर उचित प्रयास के बाद Magistrate के समक्ष जाने का legal route महत्वपूर्ण हो सकता है।

Magistrate के पास Complaint कब की जा सकती है?

Magistrate के समक्ष जाने की प्रक्रिया मामले की nature और उपलब्ध facts पर निर्भर करती है।

यदि मामला cognizable offence से संबंधित है और police ने information record नहीं की या investigation नहीं की, तो BNSS के relevant provisions के तहत Magistrate से appropriate order की मांग की जा सकती है।

Application के साथ पहले की गई police complaint और SP को भेजी गई complaint से संबंधित documents संलग्न करना उपयोगी हो सकता है।

क्या हर शिकायत में FIR दर्ज होना जरूरी है?

नहीं। सबसे पहले यह निर्धारित करना जरूरी है कि alleged offence cognizable है या non-cognizable।

BNSS Section 173 cognizable cases से संबंधित है। वहीं Section 174 non-cognizable cases की information और investigation की अलग procedure बताती है। Non-cognizable case में police information दर्ज करके informant को Magistrate के पास refer करती है और Magistrate के order के बिना police investigation नहीं कर सकती।

इसलिए किसी complaint पर FIR दर्ज न होने का कारण समझना जरूरी है।

Cognizable और Non-Cognizable में अंतर

Cognizable offence:

ऐसे offence में कानून police को निर्धारित परिस्थितियों में बिना warrant arrest और investigation की powers दे सकता है।

Non-cognizable offence:

ऐसे offence में investigation के लिए Magistrate का order आवश्यक हो सकता है, जैसा BNSS Section 174 में बताया गया है।

इस classification को समझे बिना यह कहना कि “पुलिस ने FIR नहीं लिखी, इसलिए पुलिस ने कानून तोड़ा” हर मामले में सही नहीं होगा।

क्या Online Complaint की जा सकती है?

BNSS Section 173 cognizable offence की information electronic communication के माध्यम से देने की अनुमति देता है। Electronic information को prescribed तरीके से sign किए जाने की requirement भी है।

इसके अलावा विभिन्न राज्यों की police अलग-अलग online complaint facilities उपलब्ध करा सकती हैं। Online complaint करते समय acknowledgement या reference number सुरक्षित रखना उपयोगी है।

हालांकि online complaint की practical procedure और उसका legal effect complaint की nature तथा संबंधित police system पर निर्भर कर सकता है।

Emergency में क्या करें?

यदि किसी व्यक्ति को तत्काल physical danger है या अपराध उस समय हो रहा है, तो पहले emergency police assistance लेना महत्वपूर्ण है।

ऐसी स्थिति में detailed legal complaint तैयार करने से पहले तत्काल सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बाद में available evidence और घटना का पूरा विवरण देकर formal complaint की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

Complaint के साथ कौन-से Evidence रखें?

यदि उपलब्ध हों तो complaint के साथ relevant evidence की जानकारी दी जा सकती है।

उदाहरण के लिए:

CCTV footage;

photographs;

videos;

WhatsApp या अन्य messages;

emails;

medical records;

transaction records;

documents;

witness details;

previous complaints या acknowledgements।

Original evidence को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है। Electronic evidence को edit या delete करने से बचना चाहिए।

अगर Police ने Complaint लेने से ही मना कर दिया हो

ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता को घटना की लिखित complaint तैयार करके उपलब्ध statutory route का उपयोग करना चाहिए।

पहले police station में complaint देने का record बनाना उपयोगी है। यदि cognizable offence की information record नहीं की जाती है, तो BNSS Section 173(4) के तहत SP को written complaint भेजी जा सकती है।

SP के स्तर पर भी उचित कार्रवाई न होने पर circumstances के अनुसार Magistrate के समक्ष application का विकल्प हो सकता है। BNSS Section 175(3) इस प्रकार की investigation direction से संबंधित है।

Police Complaint लिखते समय किन गलतियों से बचें?

Complaint में facts को स्पष्ट रखना चाहिए और बिना verification के आरोप या अनुमान जोड़ने से बचना चाहिए।

कुछ सामान्य सावधानियां:

घटना की सही date और location लिखें।

उपलब्ध evidence की जानकारी दें।

आरोपी की पहचान के बारे में केवल उपलब्ध facts लिखें।

पहले police station में दी गई complaint का विवरण रखें।

SP को भेजी गई complaint की copy रखें।

Postal या electronic acknowledgement सुरक्षित रखें।

अलग-अलग versions में contradictory facts लिखने से बचें।

गंभीर मामले में documents की legal review कराना उपयोगी हो सकता है।

क्या Police Officer के खिलाफ भी शिकायत की जा सकती है?

यदि शिकायतकर्ता को लगता है कि police officer ने अपने statutory duties के संबंध में गंभीर अनियमितता की है, तो उपलब्ध facts के आधार पर appropriate senior police authority या अन्य competent authority के सामने complaint की जा सकती है।

कुछ परिस्थितियों में applicable law के अनुसार police officer द्वारा information record न करने से संबंधित अलग legal consequences भी हो सकते हैं। BNS में public servant द्वारा कानून के निर्देश की अवहेलना और कुछ विशेष offences की information record न करने से संबंधित provisions मौजूद हैं।

हालांकि किसी officer के खिलाफ criminal liability का प्रश्न facts और संबंधित statutory provision के ingredients पर निर्भर करेगा।

निष्कर्ष

अगर पुलिस किसी cognizable offence की complaint या information record नहीं करती, तो मामला केवल police station तक सीमित नहीं रहता। BNSS Section 173(4) के तहत information का substance लिखित रूप में और post द्वारा Superintendent of Police को भेजा जा सकता है। यदि इसके बाद भी उचित कार्रवाई नहीं होती, तो circumstances के अनुसार BNSS Section 175(3) के तहत Magistrate से investigation का order मांगा जा सकता है।

साथ ही, यह देखना जरूरी है कि मामला cognizable है या non-cognizable, क्योंकि दोनों के लिए procedural framework अलग है।

किसी वास्तविक मामले में complaint, FIR, police response और उपलब्ध evidence की समीक्षा करके ही आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करना उचित है।

कानूनी अस्वीकरण: यह लेख सामान्य कानूनी जानकारी के उद्देश्य से है और किसी विशेष मामले में legal advice नहीं है। वास्तविक मामले में लागू कानून और procedure facts के अनुसार अलग हो सकते हैं। यह जानकारी advocate-client relationship स्थापित नहीं करती।

अगर पुलिस शिकायत नहीं सुनती तो कहाँ शिकायत करें?
यदि मामला cognizable offence से संबंधित है और police information record नहीं करती, तो BNSS Section 173(4) के तहत लिखित रूप में Superintendent of Police को complaint भेजी जा सकती है।
अगर पुलिस FIR दर्ज नहीं करती तो क्या करें?
पहले complaint का record सुरक्षित रखें। Cognizable offence की information record न होने पर BNSS Section 173(4) के तहत SP को written information भेजी जा सकती है। परिस्थितियों के अनुसार Magistrate के समक्ष भी application दी जा सकती है।
क्या SP को पुलिस के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं?
हाँ। यदि police station में cognizable offence की information record नहीं की गई है, तो BNSS Section 173(4) के तहत संबंधित Superintendent of Police को written information भेजने का प्रावधान है।
अगर SP भी कार्रवाई नहीं करता तो कहाँ जाएं?
परिस्थितियों के अनुसार BNSS Section 175(3) के तहत empowered Magistrate के समक्ष application देकर investigation का order मांगा जा सकता है।
क्या बिना jurisdiction वाली पुलिस को FIR की जानकारी दी जा सकती है?
BNSS Section 173 के अनुसार cognizable offence की information, offence किस area में हुआ इसकी परवाह किए बिना, police station के officer in charge को दी जा सकती है।
क्या non-cognizable case में भी FIR दर्ज होती है?
Non-cognizable cases के लिए BNSS Section 174 में अलग procedure है। Police information दर्ज करके informant को Magistrate के पास refer कर सकती है और Magistrate के order के बिना investigation नहीं कर सकती।